राजस्थान की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में कई युवा चेहरों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। इन्हीं में रवींद्र सिंह भाटी का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले रवींद्र सिंह भाटी ने कम समय में ही राजस्थान की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी राजनीतिक यात्रा छात्रसंघ चुनाव से शुरू होकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक पहुंची। रवींद्र सिंह भाटी की सबसे खास बात उनका जनता से सीधा जुड़ाव और संवाद करने का तरीका माना जाता है। उनकी भाषण शैली में स्थानीय मारवाड़ी भाषा का प्रभाव दिखाई देता है, जिसकी वजह से ग्रामीण और स्थानीय जनता के बीच उनकी बात आसानी से पहुंचती है। सोशल मीडिया पर सक्रियता ने भी उनकी लोकप्रियता को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में भूमिका निभाई है।
वर्ष 2019 में उन्होंने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU), जोधपुर के छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीता। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर आंदोलन किए। फीस माफी, छात्र अधिकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े विषयों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं के बीच पहचान दिलाई। इसके बाद वर्ष 2023 में उन्होंने शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की और विधायक बने। 2024 में उन्होंने बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। लोकसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाने के बावजूद उन्हें बड़ी संख्या में वोट मिले और उनकी राजनीतिक लोकप्रियता चर्चा में रही।
रवींद्र सिंह भाटी का जीवन परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | रवींद्र सिंह भाटी |
| जन्म तिथि | 3 दिसंबर 1997 |
| जन्म स्थान | दुधोड़ा, बाड़मेर, राजस्थान |
| पिता का नाम | शैतान सिंह भाटी |
| पिता का व्यवसाय | शिक्षक |
| माता का नाम | अशोक कंवर |
| माता का व्यवसाय | गृहिणी |
| प्रारंभिक शिक्षा | आदर्श विद्या मंदिर, हरसाणी एवं मयूर नोबल्स एकेडमी, बाड़मेर |
| स्नातक शिक्षा | मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर |
| कानून की पढ़ाई | जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर |
| राजनीतिक दल | निर्दलीय |
| पूर्व राजनीतिक जुड़ाव | भाजपा से जुड़े |
| छात्र राजनीति | JNVU छात्रसंघ अध्यक्ष |
| छात्रसंघ अध्यक्ष का वर्ष | 2019 |
| वर्तमान पद | शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक |
| 2024 लोकसभा चुनाव | बाड़मेर-जैसलमेर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार |
| प्रमुख पहचान | युवा नेता, छात्र राजनीति और जनसंपर्क |
| भाषण शैली | मारवाड़ी भाषा में प्रभावी संवाद |
रवींद्र सिंह भाटी का प्रारंभिक जीवन
रवींद्र सिंह भाटी का जन्म 3 दिसंबर 1997 को राजस्थान के बाड़मेर जिले के दुधोड़ा में हुआ। उनका परिवार सामान्य मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से जुड़ा बताया गया है, जहां शिक्षा को महत्व दिया जाता था। उनके पिता शैतान सिंह भाटी शिक्षक हैं, जबकि उनकी माता अशोक कंवर गृहिणी हैं। ग्रामीण और सामान्य पारिवारिक परिवेश से आने के कारण रवींद्र सिंह भाटी को अपने शुरुआती जीवन में स्थानीय समाज और लोगों के साथ जुड़ने का अवसर मिला। आगे चलकर यही सामाजिक जुड़ाव उनके राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण विशेषता बना। उनकी सार्वजनिक पहचान की शुरुआत किसी बड़े राजनीतिक पद से नहीं बल्कि छात्र राजनीति से हुई। यही वजह है कि उनकी राजनीतिक यात्रा को युवाओं से जुड़े मुद्दों और छात्र आंदोलनों के संदर्भ में भी देखा जाता है।
रवींद्र सिंह भाटी की शिक्षा
रवींद्र सिंह भाटी ने अपनी शुरुआती शिक्षा राजस्थान में ही पूरी की। उन्होंने आदर्श विद्या मंदिर, हरसाणी और मयूर नोबल्स एकेडमी, बाड़मेर से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा के दौरान उनका रुझान सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों की ओर बढ़ा। इसके बाद उन्होंने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से कानून की पढ़ाई यानी एलएलबी की। कॉलेज जीवन में ही वह छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाने लगे। उनकी शिक्षा और छात्र राजनीति का यह दौर उनके आगे के राजनीतिक सफर के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के साथ काम करते हुए उन्होंने नेतृत्व, संगठन और आंदोलन का अनुभव प्राप्त किया।
छात्र राजनीति में रवींद्र सिंह भाटी की एंट्री
रवींद्र सिंह भाटी की राजनीतिक यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती पड़ाव जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति रहा। वर्ष 2019 में उन्होंने JNVU छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीता। यह उनके सार्वजनिक जीवन की पहली बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में से एक थी। छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाना शुरू किया। उनका नेतृत्व केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्र समस्याओं को सरकार और प्रशासन के सामने रखने के लिए उन्होंने आंदोलन का रास्ता भी अपनाया। उनके छात्र राजनीति के दौर ने उन्हें बड़ी संख्या में युवाओं से सीधे संपर्क का अवसर दिया। यही नेटवर्क और जनसंपर्क आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बना।
छात्र हितों के लिए आंदोलन
छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में रवींद्र सिंह भाटी ने कई मुद्दों को लेकर आंदोलन किए। उनके नेतृत्व में विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन और आंदोलन हुए।
फीस माफी आंदोलन
कोविड-19 महामारी के दौरान विद्यार्थियों की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए उन्होंने फीस माफी आंदोलन चलाया। इस आंदोलन का उद्देश्य छात्रों पर आर्थिक दबाव को कम करने और उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना था।
जयपुर विधानसभा का घेराव
छात्रों की समस्याओं को लेकर उन्होंने जयपुर विधानसभा का घेराव भी किया। इस दौरान सरकार से विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की मांग की गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन
विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र अधिकारों और अन्य समस्याओं को लेकर भी उन्होंने कई आंदोलन किए। उनके राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में आंदोलन और छात्रों के मुद्दे प्रमुख रहे। इन आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। इससे उनकी छात्र राजनीति में संघर्षशील नेता की छवि मजबूत हुई।
2019 से 2022 तक छात्र राजनीति का दौर
वर्ष 2019 से 2022 के बीच रवींद्र सिंह भाटी की पहचान एक सक्रिय छात्र नेता के रूप में मजबूत हुई। JNVU छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया। उनकी गतिविधियों ने उन्हें केवल विश्वविद्यालय के छात्रों तक सीमित नहीं रखा। छात्र आंदोलनों के जरिए उनका संपर्क अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले युवाओं से हुआ। इस दौर में उन्होंने आंदोलन के माध्यम से अपनी राजनीतिक शैली विकसित की। जनता और युवाओं से सीधे संवाद करना, स्थानीय भाषा में अपनी बात रखना और मुद्दों को लेकर सक्रिय रहना उनकी पहचान का हिस्सा बनता गया। यही कारण रहा कि छात्र राजनीति से निकलने के बाद जब उन्होंने विधानसभा चुनाव की ओर कदम बढ़ाया, तब उनके पास पहले से ही एक मजबूत युवा समर्थक वर्ग मौजूद था।
2023 में भाजपा से जुड़ाव
वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले रवींद्र सिंह भाटी भाजपा में शामिल हुए। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट देगी। हालांकि भाजपा की ओर से उन्हें टिकट नहीं मिला। टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली। इसके बाद सर्वसमाज की सहमति से उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया। यह फैसला उनके राजनीतिक करियर का महत्वपूर्ण मोड़ बना। पार्टी के टिकट के बिना चुनाव लड़ना एक बड़ी राजनीतिक चुनौती थी, लेकिन उन्होंने जनता के समर्थन के आधार पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला
रवींद्र सिंह भाटी के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ना आसान फैसला नहीं था। उनके सामने स्थापित राजनीतिक दलों के उम्मीदवार थे, जबकि उनके पास किसी पार्टी का आधिकारिक चुनावी संगठन नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने जनसंपर्क और समर्थकों के भरोसे चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। सर्वसमाज से मिली सहमति और समर्थकों की सक्रियता उनके अभियान की महत्वपूर्ण ताकत बनी। उन्होंने चुनाव में जनता से सीधे जुड़ने और क्षेत्रीय मुद्दों को प्राथमिकता देने की कोशिश की। अंततः उन्होंने शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बनने में सफलता हासिल की।
2023 में शिव से विधायक बने
वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव रवींद्र सिंह भाटी के राजनीतिक करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। उन्होंने शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता और विधायक बने। एक युवा नेता के लिए बिना किसी प्रमुख राजनीतिक दल के टिकट के विधानसभा चुनाव जीतना उनकी राजनीतिक यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। उनकी जीत ने यह भी दिखाया कि स्थानीय स्तर पर मजबूत जनसंपर्क और समर्थकों का संगठन किसी उम्मीदवार को चुनावी सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने जनता से सीधे संपर्क को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाए रखा।
जनता से किया वादा और जनसुनवाई
चुनाव प्रचार के दौरान रवींद्र सिंह भाटी ने जनता से एक खास वादा किया था कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो पैदल लोगों के घर तक जाकर जनसुनवाई करेंगे। विधायक बनने के बाद उन्होंने इस वादे को पूरा करने की कोशिश की और लोगों से सीधे मिलकर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। उनकी यह शैली उनकी राजनीति में जनता से सीधे संपर्क की सोच को दर्शाती है। आमतौर पर राजनीतिक नेता कार्यालय या मंच के माध्यम से लोगों तक पहुंचते हैं, जबकि उन्होंने घर-घर जाकर संवाद करने की बात को अपनी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनाया। जनता के साथ सीधे संवाद के जरिए क्षेत्र की समस्याओं को समझना और विकास कार्यों की शुरुआत करना उनके विधायक बनने के बाद की गतिविधियों में शामिल रहा।
रवींद्र सिंह भाटी की राजनीतिक शैली
रवींद्र सिंह भाटी की राजनीतिक शैली में जोशीले भाषण, स्थानीय भाषा और सीधा जनसंपर्क प्रमुख रूप से दिखाई देता है। जब वह मंच से भाषण देते हैं तो उनकी भाषा और अंदाज जनता के साथ सीधा जुड़ाव बनाने की कोशिश करता है। खास तौर पर मारवाड़ी भाषा में भाषण देना उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय भाषा का इस्तेमाल उन्हें ग्रामीण और स्थानीय जनता के बीच अपनी बात सहज तरीके से रखने में मदद करता है। इससे उनके भाषणों में स्थानीय जुड़ाव और भावनात्मक प्रभाव दिखाई देता है। उनकी भाषण शैली में ऊर्जा और जोश भी दिखाई देता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर उनके भाषणों और राजनीतिक गतिविधियों को युवाओं के बीच भी काफी ध्यान मिला है।
मारवाड़ी भाषा में भाषण क्यों खास है
राजस्थान में स्थानीय भाषा और बोलियों का सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। रवींद्र सिंह भाटी अपनी राजनीतिक बातों और भाषणों में मारवाड़ी का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी भाषा सीधे उस वर्ग तक पहुंचती है जो रोजमर्रा के जीवन में स्थानीय बोली का उपयोग करता है। राजनीतिक भाषण में स्थानीय भाषा का इस्तेमाल उन्हें जनता के करीब दिखाने वाली विशेषताओं में से एक है। उनका यह अंदाज उनकी राजनीतिक पहचान को दूसरे नेताओं से अलग बनाता है। युवा नेता के रूप में उनकी भाषण शैली और सोशल मीडिया गतिविधियां उनके राजनीतिक व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में रवींद्र सिंह भाटी
वर्ष 2024 में रवींद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद लोकसभा चुनाव लड़ना उनके राजनीतिक सफर का अगला बड़ा कदम था। लोकसभा चुनाव में उनका मुकाबला बड़े राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों से था। हालांकि वह चुनाव जीत नहीं सके, लेकिन उन्हें बड़ी संख्या में वोट मिले और उनके समर्थन ने चुनावी मुकाबले को काफी चर्चित बनाया। उनकी लोकप्रियता का असर चुनावी समीकरणों पर भी दिखाई दिया। उपलब्ध source के अनुसार उनकी मजबूत पकड़ और जनसमर्थन ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की स्थिति को प्रभावित किया।
लोकसभा चुनाव ने बढ़ाई राजनीतिक पहचान
2024 का लोकसभा चुनाव रवींद्र सिंह भाटी के लिए केवल एक चुनाव नहीं था, बल्कि उनकी राजनीतिक पहुंच को व्यापक बनाने का अवसर भी था। एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ना अपने आप में बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद उनके अभियान में बड़ी संख्या में समर्थक जुड़े और उन्हें लाखों वोट मिले। विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद लोकसभा चुनाव में उनकी भागीदारी ने यह दिखाया कि उनका राजनीतिक प्रभाव केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। हालांकि चुनाव में जीत नहीं मिली, लेकिन उनकी लोकप्रियता और जनसमर्थन ने राजस्थान की राजनीति में उनके भविष्य को लेकर चर्चा को और मजबूत किया।
सोशल मीडिया पर रवींद्र सिंह भाटी की लोकप्रियता
आज के राजनीतिक दौर में सोशल मीडिया नेताओं के लिए जनता से सीधे जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। रवींद्र सिंह भाटी भी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। वह अपनी राजनीतिक गतिविधियों, विचारों और जनता से जुड़े संवाद को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हैं। वींद्र सिंह भाटी की राजनीति में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। छात्र राजनीति से शुरुआत करने के कारण उनके शुरुआती समर्थकों में बड़ी संख्या में युवा शामिल रहे। JNVU छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने छात्र मुद्दों पर आंदोलन किए। फीस माफी आंदोलन और छात्र अधिकारों से जुड़े आंदोलनों ने उन्हें युवाओं के बीच पहचान दिलाई। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी उनकी युवा समर्थक छवि दिखाई दी। सोशल मीडिया पर सक्रियता ने इस जुड़ाव को और मजबूत किया। उनकी राजनीति में युवाओं से सीधा संवाद, जोशीली भाषा और सोशल मीडिया का उपयोग तीन महत्वपूर्ण तत्व दिखाई देते हैं।
रवींद्र सिंह भाटी का संघर्ष और राजनीतिक सफर
रवींद्र सिंह भाटी ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी दौर में उन्होंने युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाई और नेतृत्व क्षमता विकसित की। वर्ष 2023 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में शिव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधायक बने। विधायक बनने के बाद उन्होंने जनता से सीधे जुड़ने और लोगों की समस्याएं सुनने पर विशेष जोर दिया। छात्र राजनीति से विधानसभा तक का उनका सफर राजस्थान की युवा राजनीति में चर्चा का विषय बना। उनकी मारवाड़ी भाषा में भाषण शैली, युवाओं से सीधा संवाद और सोशल मीडिया पर सक्रियता उनकी लोकप्रियता के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि वह लोकसभा चुनाव जीत नहीं सके, लेकिन उन्हें अच्छा जनसमर्थन मिला। छात्रसंघ अध्यक्ष से विधायक और फिर लोकसभा उम्मीदवार तक का उनका सफर संघर्ष, जनसंपर्क और राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है। रवींद्र सिंह भाटी की राजनीति में स्थानीय मुद्दों, युवाओं और जनता के साथ सीधा संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनका अब तक का सफर राजस्थान की राजनीति में एक युवा और चर्चित स्वतंत्र राजनीतिक चेहरे के रूप में उनकी पहचान को मजबूत करता है।
रवींद्र सिंह भाटी से जुड़े प्रश्न (FAQ)
1. रवींद्र सिंह भाटी कौन हैं?
रवींद्र सिंह भाटी राजस्थान के युवा राजनेता हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और वर्ष 2023 में शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक बने।
2. रवींद्र सिंह भाटी का जन्म कब हुआ था?
रवींद्र सिंह भाटी का जन्म 3 दिसंबर 1997 को राजस्थान के बाड़मेर जिले के दुधोड़ा गांव में हुआ था।
3. रवींद्र सिंह भाटी के पिता का नाम क्या है?
रवींद्र सिंह भाटी के पिता का नाम शैतान सिंह भाटी है। उनके पिता शिक्षक हैं।
4. रवींद्र सिंह भाटी की शिक्षा क्या है?
रवींद्र सिंह भाटी ने राजस्थान में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से कानून की पढ़ाई की।
5. रवींद्र सिंह भाटी JNVU छात्रसंघ अध्यक्ष कब बने?
रवींद्र सिंह भाटी वर्ष 2019 में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU), जोधपुर के छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे।
6. रवींद्र सिंह भाटी किस विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं?
रवींद्र सिंह भाटी राजस्थान के शिव विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्होंने वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता था।
7. रवींद्र सिंह भाटी ने 2023 का विधानसभा चुनाव किस पार्टी से लड़ा था?
रवींद्र सिंह भाटी ने वर्ष 2023 में शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
8. रवींद्र सिंह भाटी ने 2024 लोकसभा चुनाव कहां से लड़ा था?
रवींद्र सिंह भाटी ने वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा था।
9. रवींद्र सिंह भाटी की लोकप्रियता की वजह क्या है?
रवींद्र सिंह भाटी की लोकप्रियता के प्रमुख कारणों में युवाओं से जुड़ाव, छात्र राजनीति का अनुभव, जनता से सीधा संवाद, मारवाड़ी भाषा में भाषण और सोशल मीडिया पर सक्रियता शामिल हैं।
10. रवींद्र सिंह भाटी किस भाषा में भाषण देने के लिए जाने जाते हैं?
रवींद्र सिंह भाटी स्थानीय जनता से जुड़ने के लिए मारवाड़ी भाषा में भाषण देने के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।