भारत को सदियों से देवभूमि कहा जाता है। इस पवित्र भूमि पर समय-समय पर अनेक संत महात्माओं ने जन्म लिया और समाज को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता की राह दिखाई। इन संतों ने केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं दिया बल्कि समाज सुधार और राष्ट्र सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे ही एक महान संत हैं श्री श्री 1008 महंत प्रताप पूरी जी महाराज। राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर संत बनने तक और फिर राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने तक उनकी जीवन यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने आध्यात्मिकता के साथ-साथ समाज सेवा और राजनीति के माध्यम से भी लोगों की सेवा करने का कार्य किया है। इस लेख में हम महंत प्रताप पूरी जी महाराज के जीवन, शिक्षा, संत बनने की कहानी और उनके राजनीतिक सफर के बारे में विस्तार से जानेंगे।
महंत प्रताप पूरी जी महाराज का परिचय
महंत प्रताप पूरी जी महाराज का जन्म 14 अप्रैल 1964 को राजस्थान के बाड़मेर जिले के महाबार गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बलवंत सिंह और माता का नाम हरकुँवर था। उनका परिवार धार्मिक और संस्कारी विचारों वाला था। बचपन से ही उन्हें धार्मिक वातावरण मिला जिसने उनके व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | महंत प्रताप पूरी |
| जन्म | 14 अप्रैल 1964 |
| जन्म स्थान | महाबार गाँव, जिला बाड़मेर (राजस्थान) |
| पिता | बलवंत सिंह |
| माता | हरकुँवर |
| शिक्षा | लीलसर (बाड़मेर) और हरियाणा गुरुकुल |
| गुरु | मोहनपुरी जी महाराज |
| पेशा | आध्यात्मिक गुरु, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ |
| राजनीतिक दल | भारतीय जनता पार्टी |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिन्दू |
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बाड़मेर जिले के लीलसर गांव से प्राप्त की और बाद में आगे की पढ़ाई के लिए हरियाणा के गुरुकुल में अध्ययन किया। वे एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ समाजसेवी और राजनीतिज्ञ भी हैं। वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं और राजस्थान की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
महंत प्रताप पूरी जी के जन्म से जुड़ा रहस्य
महंत प्रताप पूरी जी के जन्म से जुड़ी एक रोचक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि उनके पिता बलवंत सिंह को लंबे समय तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ था। एक दिन एक संत उनके घर आए और उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा कि जल्द ही उनके घर संतान का जन्म होगा। कुछ समय बाद उनकी माता हरकुँवर गर्भवती हुईं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान एक गंभीर घटना हुई। बताया जाता है कि उन्हें एक पागल कुत्ते ने काट लिया था। इस कारण उनके शरीर में बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे और परिवार के लोग काफी परेशान हो गए। कई जगह इलाज करवाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली।
तब गांव के कुछ लोगों ने सलाह दी कि उन्हें तारातरा मठ ले जाया जाए। वहां के प्रसिद्ध संत मोहनपुरी जी महाराज को सिद्ध संत माना जाता था। जब परिवार वाले उन्हें मठ लेकर पहुंचे तो उन्होंने पूरी घटना बताई और सहायता की प्रार्थना की। कहा जाता है कि मोहनपुरी जी महाराज ने पूरी रात साधना की और अगले दिन कहा कि चिंता करने की जरूरत नहीं है, एक पुत्र का जन्म होगा जो आगे चलकर संत बनेगा और समाज की सेवा करेगा। कुछ समय बाद उनके घर एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम प्रताप पूरी रखा गया।
प्रताप पूरी जी का तारातरा मठ से जुड़ाव
जब प्रताप पूरी जी लगभग पाँच वर्ष के थे तब वे अक्सर रोते रहते थे। परिवार वालों को मोहनपुरी जी महाराज की भविष्यवाणी याद आई कि यह बालक आगे चलकर उनका शिष्य बनेगा। इसके बाद उनके परिवार वाले उन्हें तारातरा मठ लेकर गए और मोहनपुरी जी महाराज को समर्पित कर दिया। वहीं से उनके आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत हुई। मोहनपुरी जी महाराज ने उन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया और उन्हें विद्यालय में दाखिला दिलाया। तारातरा मठ में रहते हुए उन्हें धार्मिक शिक्षा, संस्कार और सेवा की भावना सिखाई गई। यही वह स्थान था जहां से उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई और वे धीरे-धीरे आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने लगे।
गुरुकुल शिक्षा
प्रताप पूरी जी पढ़ाई में काफी तेज और मेहनती छात्र थे। एक बार उन्होंने ओमानंद महाराज की एक पुस्तक पढ़ी जिससे वे काफी प्रभावित हुए। उस पुस्तक से प्रेरित होकर उन्होंने गुरुकुल शिक्षा प्राप्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद वे हरियाणा के गुरुकुल में पढ़ने के लिए गए जहां उन्होंने संस्कृत, वेद और शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। गुरुकुल में पढ़ाई के दौरान वे महान व्यक्तित्वों जैसे लाल बहादुर शास्त्री और स्वामी विवेकानंद के विचारों से काफी प्रभावित हुए। इन महान नेताओं की शिक्षाओं ने उनके अंदर देश सेवा, गौ सेवा और समाज सेवा की भावना को और मजबूत कर दिया। गुरुकुल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे वापस तारातरा मठ लौट आए और वहीं से उन्होंने धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।
छात्र जीवन और नेतृत्व क्षमता
आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें माउंट आबू भेजने की योजना थी, लेकिन उन्होंने हरियाणा के झज्जर महाविद्यालय में पढ़ाई करने का निर्णय लिया। वहां उन्होंने अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता से जल्दी ही पहचान बना ली। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए और जल्द ही छात्र नेता के रूप में जाने जाने लगे। उनकी भाषण देने की शैली और नेतृत्व क्षमता के कारण छात्रों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी। पढ़ाई के प्रति उनकी गंभीरता का एक उदाहरण यह भी है कि एक बार व्याकरण की परीक्षा में उन्हें 100 में से 99.5 अंक मिले। उन्हें लगा कि उनकी कॉपी सही तरीके से जांची नहीं गई है इसलिए उन्होंने उसे दोबारा जांच करवाने की मांग की। इससे उनकी पढ़ाई के प्रति लगन और ईमानदारी का पता चलता है।
खेलकूद में रुचि
प्रताप पूरी जी केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि खेलकूद में भी काफी सक्रिय थे। उन्हें विशेष रूप से कबड्डी खेलना बहुत पसंद था। एक बार कबड्डी खेलते समय वे रेड के लिए विपक्षी टीम के मैदान में गए। उसी दौरान एक खिलाड़ी ने उनका पैर पकड़ लिया और वे गिर पड़े जिससे उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उनका इलाज किया गया। बताया जाता है कि डॉक्टर ने उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन दिया लेकिन उसका उन पर ज्यादा असर नहीं हुआ। अंत में डॉक्टर ने बिना बेहोशी के ही उनका इलाज किया। इस घटना के बाद उन्होंने खेलों में अपनी रुचि थोड़ी कम कर दी।
सामाजिक और धार्मिक कार्य
तारातरा मठ में रहने के दौरान प्रताप पूरी जी ने समाज सेवा के कई कार्य किए। उन्होंने समाज में धार्मिक जागरूकता फैलाने के लिए अनेक प्रवचन और कार्यक्रम आयोजित किए। वे सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और गौ सेवा जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक करते रहे। उनके प्रवचनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और उनके विचारों से प्रेरणा लेते हैं। उनका उद्देश्य हमेशा से समाज को सही दिशा देना और लोगों को धर्म तथा संस्कृति से जोड़ना रहा है।
महंत प्रताप पूरी जी का राजनीति में प्रवेश
महंत प्रताप पूरी जी लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय थे। हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश वर्ष 2018 में किया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन किया और राजस्थान के पोकरण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस के उम्मीदवार शाले मोहम्मद ने उन्हें लगभग 872 वोटों से हराया। हालांकि इस हार के बाद भी उन्होंने राजनीति और समाज सेवा का कार्य जारी रखा और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे।
2023 का विधानसभा चुनाव और बड़ी जीत
2018 की हार के बाद भी महंत प्रताप पूरी जी ने हार नहीं मानी और लगातार लोगों के बीच काम करते रहे। इसके बाद वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से पोकरण विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा। 3 दिसंबर 2023 को चुनाव परिणाम घोषित हुए और इस बार उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को लगभग 35,782 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह जीत उनके राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
महंत प्रताप पूरी जी की संपत्ति
2023 के चुनावी हलफनामे के अनुसार महंत प्रताप पूरी जी महाराज की कुल घोषित संपत्ति लगभग 50 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। उनके हलफनामे के अनुसार उनके पास लगभग 1 लाख 41 हजार रुपये नकद हैं जबकि लगभग 50 लाख रुपये बैंक खातों में जमा हैं। उनके बैंक खाते मुख्य रूप से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा में बताए गए हैं। इसके अलावा उनके नाम पर कोई बड़े शेयर या बॉन्ड दर्ज नहीं हैं और उनके ऊपर किसी प्रकार की बड़ी देनदारी भी दर्ज नहीं है। यह जानकारी उनके द्वारा 2023 के चुनाव के दौरान जमा किए गए आधिकारिक हलफनामे में दी गई थी।
महंत प्रताप पूरी जी महाराज का जीवन एक साधारण परिवार से निकलकर संत, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ बनने तक की प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने अपने गुरु के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक जीवन को अपनाया और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रहे। आज वे राजस्थान की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बन चुके हैं और साथ ही आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी देते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि यदि व्यक्ति के अंदर सेवा और समर्पण की भावना हो तो वह समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।